कौसल्यादि मातु सब धाई
कौसल्यादि मातु सब धाई
चौपाई ५, दोहा ६ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
कौसल्यादि मातु सब धाई। निरखि बच्छ जनु धेनु लवाई॥ ५ ॥
अर्थ
कौसल्या आदि सब माताएँ दौड़ीं, मानो बछड़ों को देखकर धेनुएँ दौड़ी हों।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “राम का स्वागत, भरत मिलाप” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के स्वागत और भरत मिलाप के आनंदमय प्रसंग का वर्णन है।
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राम का स्वागत, भरत मिलाप