करहिं आरती आरतिहर कें
करहिं आरती आरतिहर कें
चौपाई ४, दोहा ९ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
करहिं आरती आरतिहर कें। रघुकुल कमल बिपिन दिनकर कें॥ पुर सोभा संपति कल्याना। निगम सेष सारदा बखाना॥ ४ ॥
अर्थ
वे आरतिहर (दुःखों को हरनेवाले) और रघुकुलरूपी कमलवन के सूर्य श्रीरामजी की आरती कर रही हैं। नगर की शोभा, संपत्ति और कल्याण का वेद, शेषजी और सरस्वतीजी वर्णन करते हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “राम का स्वागत, भरत मिलाप” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के स्वागत और भरत मिलाप के आनंदमय प्रसंग का वर्णन है।
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राम का स्वागत, भरत मिलाप