काल कर्म गुन दोष सुभाऊ
काल कर्म गुन दोष सुभाऊ
चौपाई १, दोहा ११४ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
काल कर्म गुन दोष सुभाऊ। कछु दुख तुम्हहि न ब्यापिहि काऊ॥ राम रहस्य ललित बिधि नाना। गुप्त प्रगट इतिहास पुराना॥ १ ॥
अर्थ
काल, कर्म, गुण, दोष और स्वभाव से उत्पन्न कुछ भी दुःख तुमको कभी नहीं व्यापेगा। अनेकों प्रकार के सुन्दर श्रीरामजी के रहस्य (गुप्त मर्म के चरित्र और गुण), जो इतिहास और पुराणों में गुप्त और प्रकट हैं (वर्णित और लक्षित हैं)।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “लोमशजी से शाप और अनुग्रह” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ११४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में काकभुशुण्डिजी को लोमश मुनि द्वारा शाप और अनुग्रह मिलने तथा रामभक्ति दृढ़ होने का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
लोमशजी से शाप और अनुग्रह