ग्यान बिबेक बिरति बिग्याना
ग्यान बिबेक बिरति बिग्याना
चौपाई १, दोहा ८४ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
ग्यान बिबेक बिरति बिग्याना। मुनि दुर्लभ गुन जे जग नाना॥ आजु देउँ सब संसय नाहीं। मागु जो तोहि भाव मन माहीं॥ १ ॥
अर्थ
ज्ञान, विवेक, वैराग्य, विज्ञान (तत्त्वज्ञान) और वे अनेकों गुण जो जगत् में मुनियों के लिये भी दुर्लभ हैं, ये सब मैं आज तुझे दूँगा, इसमें संशय नहीं। जो तेरे मन में भावे, सो माँग ले।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ८४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।
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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा