कहेउँ परम पुनीत इतिहासा

चौपाई १, दोहा १२६ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

कहेउँ परम पुनीत इतिहासा। सुनत श्रवन छूटहिं भव पासा॥ प्रनत कल्पतरु करुना पुंजा। उपजइ प्रीति राम पद कंजा॥ १ ॥

अर्थ

मैंने यह परम पवित्र इतिहास कहा, जिसे सुनते ही कानों से भवपाश छूट जाते हैं और शरणागतों के लिये कल्पतरु तथा करुणापुंज श्रीरामजी के चरणकमलों में प्रेम उत्पन्न होता है।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “रामायण माहात्म्य और फलस्तुति” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १२६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामायण की महिमा, तुलसीदास की विनय और पाठ-श्रवण के पुण्यफल का वर्णन है।

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रामायण माहात्म्य और फलस्तुति