गिरिजा संत समागम सम न लाभ

दोहा १२५ (ख) · उत्तरकाण्ड

दोहा पाठ

गिरिजा संत समागम सम न लाभ कछु आन। बिनु हरि कृपा न होइ सो गावहिं बेद पुरान॥ १२५ (ख) ॥

अर्थ

हे गिरिजे! संत-समागम के समान दूसरा कोई लाभ नहीं है। पर वह (संत-समागम) श्रीहरि की कृपा के बिना नहीं हो सकता, ऐसा वेद और पुराण गाते हैं।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “रामायण माहात्म्य और फलस्तुति” प्रकरण का दोहा १२५ (ख) है। इस प्रकरण में रामायण की महिमा, तुलसीदास की विनय और पाठ-श्रवण के पुण्यफल का वर्णन है।

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रामायण माहात्म्य और फलस्तुति