जिन्हहि सोक ते कहउँ बखानी

चौपाई २, दोहा ३१ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

जिन्हहि सोक ते कहउँ बखानी। प्रथम अबिद्या निसा नसानी॥ अघ उलूक जहँ तहाँ लुकाने। काम क्रोध कैरव सकुचाने॥ २ ॥

अर्थ

जिन-जिन को शोक हुआ, उन्हें मैं बखानकर कहता हूँ। [सर्वत्र प्रकाश छा जाने से] पहले तो अविद्या रूपी रात्रि नष्ट हो गयी। पाप रूपी उल्लू जहाँ-तहाँ छिप गये और काम-क्रोध रूपी कुमुद मुँद गये।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चारों भाइयों के पुत्रजन्म, अयोध्या की शोभा और सनकादि मुनियों के श्रीराम से परम तत्त्व संवाद का वर्णन है।

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पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन