जब ते राम प्रताप खगेसा

चौपाई १, दोहा ३१ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

जब ते राम प्रताप खगेसा। उदित भयउ अति प्रबल दिनेसा॥ पूरि प्रकास रहेउ तिहुँ लोका। बहुतेन्ह सुख बहुतन मन सोका॥ १ ॥

अर्थ

[काकभुशुण्डिजी कहते हैं--] हे पक्षिराज गरुड़जी ! जब से रामप्रतापरूपी अत्यन्त प्रचण्ड सूर्य उदित हुआ, तबसे तीनों लोकों में पूर्ण प्रकाश भर गया है। इससे बहुतों को सुख और बहुतों के मन में शोक हुआ।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चारों भाइयों के पुत्रजन्म, अयोध्या की शोभा और सनकादि मुनियों के श्रीराम से परम तत्त्व संवाद का वर्णन है।

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पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन