जातरूप मनि रचित अटारीं

चौपाई २, दोहा २७ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

जातरूप मनि रचित अटारीं। नाना रंग रुचिर गच ढारीं॥ पुर चहुँ पास कोट अति सुंदर। रचे कँगूरा रंग रंग बर॥ २ ॥

अर्थ

[दिव्य] स्वर्ण और रत्नों से बनी हुई अट्टारियाँ हैं। उनमें [मणि-रत्नों की] अनेक रंगों की सुन्दर ढली हुई फर्शें हैं। नगर के चारों ओर अत्यन्त सुन्दर परकोटा बना है, जिस पर सुन्दर रंग-बिरंगे कँगूरे बने हैं।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चारों भाइयों के पुत्रजन्म, अयोध्या की शोभा और सनकादि मुनियों के श्रीराम से परम तत्त्व संवाद का वर्णन है।

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पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन