नारदादि सनकादि मुनीसा
नारदादि सनकादि मुनीसा
चौपाई १, दोहा २७ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
नारदादि सनकादि मुनीसा। दरसन लागि कोसलाधीसा॥ दिन प्रति सकल अजोध्या आवहिं। देखि नगरु बिरागु बिसरावहिं॥ १ ॥
अर्थ
नारद आदि और सनक आदि मुनीश्वर सब कोसलाधीश श्रीरामजी के दर्शन के लिये प्रतिदिन अयोध्या आते हैं और उस [दिव्य] नगर को देखकर वैराग्य भुला देते हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चारों भाइयों के पुत्रजन्म, अयोध्या की शोभा और सनकादि मुनियों के श्रीराम से परम तत्त्व संवाद का वर्णन है।
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पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन