जप तप मख सम दम ब्रत

चौपाई ३, दोहा ९५ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

जप तप मख सम दम ब्रत दाना। बिरति बिबेक जोग बिग्याना॥ सब कर फल रघुपति पद प्रेमा। तेहि बिनु कोउ न पावइ छेमा॥ ३ ॥

अर्थ

अनेक जप, तप, यज्ञ, शम (मन को रोकना), दम (इन्द्रियों को रोकना), व्रत, दान, वैराग्य, विवेक, योग, विज्ञान आदि सब का फल श्रीरघुनाथजी के चरणों में प्रेम होना है। इसके बिना कोई कल्याण नहीं पा सकता।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ९५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।

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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा