जन्मभूमि मम पुरी सुहावनि
जन्मभूमि मम पुरी सुहावनि
चौपाई ३, दोहा ४ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
जन्मभूमि मम पुरी सुहावनि। उत्तर दिसि बह सरजू पावनि॥ जा मज्जन ते बिनहिं प्रयासा। मम समीप नर पावहिं बासा॥ ३ ॥
अर्थ
यह सुहावनी पुरी मेरी जन्मभूमि है। इसके उत्तर दिशा में [जीवों को] पवित्र करनेवाली सरयू नदी बहती है, जिसमें स्नान करने से मनुष्य बिना ही परिश्रम मेरे समीप निवास (सामीप्य मुक्ति) पा जाते हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “भरत विरह, हनुमान आगमन” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत के विरह, हनुमान के शुभ आगमन और अयोध्या में हर्ष का वर्णन है।
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भरत विरह, हनुमान आगमन