जद्यपि सब बैकुंठ बखाना
जद्यपि सब बैकुंठ बखाना
चौपाई २, दोहा ४ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
जद्यपि सब बैकुंठ बखाना। बेद पुरान बिदित जगु जाना॥ अवधपुरी सम प्रिय नहिं सोऊ। यह प्रसंग जानइ कोउ कोऊ॥ २ ॥
अर्थ
यद्यपि सबने वैकुण्ठ की बड़ाई की है--यह वेद-पुराणों में प्रसिद्ध है और जगत् जानता है, परन्तु अवधपुरी के समान मुझे वह भी प्रिय नहीं है। यह बात (भेद) कोई-कोई (विरले ही) जानते हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “भरत विरह, हनुमान आगमन” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत के विरह, हनुमान के शुभ आगमन और अयोध्या में हर्ष का वर्णन है।
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भरत विरह, हनुमान आगमन