जानि समय सनकादिक आए

चौपाई २, दोहा ३२ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

जानि समय सनकादिक आए। तेज पुंज गुन सील सुहाए॥ ब्रह्मानंद सदा लयलीना। देखत बालक बहुकालीना॥ २ ॥

अर्थ

सुअवसर जानकर सनकादि मुनि आए, जो तेज के पुंज, सुन्दर गुण और शील से युक्त तथा सदा ब्रह्मानन्द में लवलीन रहते हैं। देखने में तो वे बालक लगते हैं, परन्तु हैं बहुत समय के।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चारों भाइयों के पुत्रजन्म, अयोध्या की शोभा और सनकादि मुनियों के श्रीराम से परम तत्त्व संवाद का वर्णन है।

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पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन