जहँ लगि साधन बेद बखानी
जहँ लगि साधन बेद बखानी
चौपाई ४, दोहा १२६ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
जहँ लगि साधन बेद बखानी। सब कर फल हरि भगति भवानी॥ सो रघुनाथ भगति श्रुति गाई। राम कृपाँ काहूँ एक पाई॥ ४ ॥
अर्थ
जहाँ तक वेदों ने साधन बतलाये हैं, हे भवानी! उन सबका फल हरि-भक्ति ही है। पर श्रुतियों में गायी हुई वह श्रीरघुनाथजी की भक्ति श्रीरामजी की कृपा से किसी एक ने ही पायी है।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “रामायण माहात्म्य और फलस्तुति” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १२६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामायण की महिमा, तुलसीदास की विनय और पाठ-श्रवण के पुण्यफल का वर्णन है।
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रामायण माहात्म्य और फलस्तुति