जानिअ तब मन बिरुज गोसाँई
जानिअ तब मन बिरुज गोसाँई
चौपाई ५, दोहा १२२ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
जानिअ तब मन बिरुज गोसाँई। जब उर बल बिराग अधिकाई॥ सुमति छुधा बाढ़इ नित नई। बिषय आस दुर्बलता गई॥ ५ ॥
अर्थ
हे गोसाईं! मन को नीरोग हुआ तब जानना चाहिये, जब हृदय में वैराग्य का बल बढ़ जाय, उत्तम बुद्धि-रूपी भूख नित नयी बढ़ती रहे और विषयों की आशा-रूपी दुर्बलता मिट जाय।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “भजन महिमा” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा १२२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हरि भजन और प्रभु के नाम-स्मरण से भवसागर पार होने की महिमा का वर्णन है।
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भजन महिमा