होहिं सगुन सुभ बिबिध बिधि बाजहिं
होहिं सगुन सुभ बिबिध बिधि बाजहिं
दोहा ९ (ख) · उत्तरकाण्ड
दोहा पाठ
होहिं सगुन सुभ बिबिध बिधि बाजहिं गगन निसान। पुर नर नारि सनाथ करि भवन चले भगवान॥ ९ (ख) ॥
अर्थ
अनेक प्रकार के शुभ शकुन हो रहे हैं, आकाश में नगाड़े बज रहे हैं। नगर के पुरुषों और स्त्रियों को सनाथ (दर्शन द्वारा कृतार्थ) करके भगवान् श्रीरामचन्द्रजी महल को चले।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “राम का स्वागत, भरत मिलाप” प्रकरण का दोहा ९ (ख) है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के स्वागत और भरत मिलाप के आनंदमय प्रसंग का वर्णन है।
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राम का स्वागत, भरत मिलाप