हिम ते अनल प्रगट बरु होई
हिम ते अनल प्रगट बरु होई
चौपाई १०, दोहा १२२ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
हिम ते अनल प्रगट बरु होई। बिमुख राम सुख पाव न कोई॥ १० ॥
अर्थ
बर्फ से भले ही अग्नि प्रकट हो जाय, परन्तु श्रीराम से विमुख होकर कोई भी सुख नहीं पा सकता।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “भजन महिमा” प्रकरण का चौपाई १०, दोहा १२२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हरि भजन और प्रभु के नाम-स्मरण से भवसागर पार होने की महिमा का वर्णन है।
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भजन महिमा