हरषित गुर परिजन अनुज भूसुर बृंद

दोहा ३ (क) · उत्तरकाण्ड

दोहा पाठ

हरषित गुर परिजन अनुज भूसुर बृंद समेत। चले भरत मन प्रेम अति सन्मुख कृपानिकेत॥ ३ (क) ॥

अर्थ

गुरु वसिष्ठजी, परिजन, अनुज शत्रुघ्न तथा भूसुर-बृंद के साथ हर्षित होकर भरतजी अत्यन्त प्रेमपूर्ण मन से कृपानिकेत श्रीरामजी के सामने चले।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “भरत विरह, हनुमान आगमन” प्रकरण का दोहा ३ (क) है। इस प्रकरण में भरत के विरह, हनुमान के शुभ आगमन और अयोध्या में हर्ष का वर्णन है।

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भरत विरह, हनुमान आगमन