बहुतक चढ़ीं अटारिन्ह निरखहिं गगन बिमान

दोहा ३ (ख) · उत्तरकाण्ड

दोहा पाठ

बहुतक चढ़ीं अटारिन्ह निरखहिं गगन बिमान। देखि मधुर सुर हरषित करहिं सुमंगल गान॥ ३ (ख) ॥

अर्थ

बहुत-सी स्त्रियाँ अटारियों पर चढ़ीं आकाश में विमान देख रही हैं और उसे देखकर हर्षित होकर मधुर स्वर से सुमंगल गान गा रही हैं।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “भरत विरह, हनुमान आगमन” प्रकरण का दोहा ३ (ख) है। इस प्रकरण में भरत के विरह, हनुमान के शुभ आगमन और अयोध्या में हर्ष का वर्णन है।

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भरत विरह, हनुमान आगमन