अवधपुरी प्रभु आवत जानी
अवधपुरी प्रभु आवत जानी
चौपाई ५, दोहा ३ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
अवधपुरी प्रभु आवत जानी। भई सकल सोभा कै खानी॥ बहइ सुहावन त्रिबिध समीरा। भइ सरजू अति निर्मल नीरा॥ ५ ॥
अर्थ
अवधपुरी प्रभु को आते जानकर सम्पूर्ण शोभाओं की खान हो गयी। तीनों प्रकार की सुन्दर वायु बहने लगी। सरयूजी अति निर्मल जलवाली हो गयीं (अर्थात् सरयूजी का जल अत्यन्त निर्मल हो गया)।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “भरत विरह, हनुमान आगमन” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत के विरह, हनुमान के शुभ आगमन और अयोध्या में हर्ष का वर्णन है।
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भरत विरह, हनुमान आगमन