ग्यान अगम प्रत्यूह अनेका

चौपाई २, दोहा ४५ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

ग्यान अगम प्रत्यूह अनेका। साधन कठिन न मन कहुँ टेका॥ करत कष्ट बहु पावइ कोऊ। भक्ति हीन मोहि प्रिय नहिं सोऊ॥ २ ॥

अर्थ

ज्ञान अगम (दुर्गम) है, [और] उसकी प्राप्ति में अनेक विघ्न हैं। उसका साधन कठिन है और उसमें मन के लिए कोई आधार नहीं है। बहुत कष्ट करने पर कोई उसे पा भी लेता है, तो वह भी भक्तिरहित होने से मुझको प्रिय नहीं होता।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “राम का प्रजा को उपदेश” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ४५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा प्रजा को धर्म, वैराग्य और भक्ति का उपदेश तथा पुरवासियों की कृतज्ञता का वर्णन है।

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राम का प्रजा को उपदेश