जौं परलोक इहाँ सुख चहहू
जौं परलोक इहाँ सुख चहहू
चौपाई १, दोहा ४५ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
जौं परलोक इहाँ सुख चहहू। सुनि मम बचन हृदयँ दृढ़ गहहू॥ सुलभ सुखद मारग यह भाई। भगति मोरि पुरान श्रुति गाई॥ १ ॥
अर्थ
यदि परलोक में और यहाँ दोनों जगह सुख चाहते हो, तो मेरे वचन सुनकर उन्हें हृदय में दृढ़ता से पकड़ रखो। हे भाई! यह मेरी भक्ति का मार्ग सुलभ और सुखदायक है, पुराणों और वेदों ने इसे गाया है।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “राम का प्रजा को उपदेश” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ४५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा प्रजा को धर्म, वैराग्य और भक्ति का उपदेश तथा पुरवासियों की कृतज्ञता का वर्णन है।
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राम का प्रजा को उपदेश