जुग बिधि ज्वर मत्सर अबिबेका

चौपाई १९, दोहा १२१ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

जुग बिधि ज्वर मत्सर अबिबेका। कहँ लगि कहौं कुरोग अनेका॥ १९ ॥

अर्थ

मत्सर और अविवेक दो प्रकार के ज्वर हैं। इस प्रकार अनेकों बुरे रोग हैं, जिन्हें कहाँ तक कहूँ।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ के सात प्रश्न और उत्तर” प्रकरण का चौपाई १९, दोहा १२१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गरुड़ के सात प्रश्नों पर काकभुशुण्डि का आध्यात्मिक उपदेश का वर्णन है।

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गरुड़ के सात प्रश्न और उत्तर