देखि मातु आतुर उठि धाई

चौपाई ४, दोहा ८८ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

देखि मातु आतुर उठि धाई। कहि मृदु बचन लिए उर लाई॥ गोद राखि कराव पय पाना। रघुपति चरित ललित कर गाना॥ ४ ॥

अर्थ

यह देखकर माता तुरंत उठकर दौड़ीं और कोमल वचन कहकर उन्होंने श्रीरामजी को छाती से लगा लिया। वे गोद में लेकर उन्हें दूध पिलाने लगीं और श्रीरघुनाथजी की ललित लीलाएँ गाने लगीं।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ८८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।

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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा