दधि दुर्बा रोचन फल फूला

चौपाई ३, दोहा ३ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

दधि दुर्बा रोचन फल फूला। नव तुलसी दल मंगल मूला॥ भरि भरि हेम थार भामिनी। गावत चलिं सिंधुरगामिनी॥ ३ ॥

अर्थ

[ श्रीरामजी के स्वागत के लिये] दही, दूब, गोरोचन, फल, फूल और नव तुलसीदल, मंगलमूल आदि वस्तुएँ सोने के थालों में भर-भरकर हथिनी की-सी चाल वाली सौभाग्यवती स्त्रियाँ [उन्हें लेकर] गाती हुई चलीं।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “भरत विरह, हनुमान आगमन” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत के विरह, हनुमान के शुभ आगमन और अयोध्या में हर्ष का वर्णन है।

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भरत विरह, हनुमान आगमन