सुनत सकल जननीं उठि धाईं
सुनत सकल जननीं उठि धाईं
चौपाई २, दोहा ३ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनत सकल जननीं उठि धाईं। कहि प्रभु कुसल भरत समुझाईं॥ समाचार पुरबासिन्ह पाए। नर अरु नारि हरषि सब धाए॥ २ ॥
अर्थ
खबर सुनते ही सब माताएँ उठ दौड़ीं। भरतजी ने प्रभु की कुशल कहकर सबको समझाया। नगरनिवासियों ने यह समाचार पाया, तो स्त्री-पुरुष सभी हर्षित होकर दौड़े।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “भरत विरह, हनुमान आगमन” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत के विरह, हनुमान के शुभ आगमन और अयोध्या में हर्ष का वर्णन है।
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भरत विरह, हनुमान आगमन