चारु चित्रसाला गृह गृह प्रति लिखे
चारु चित्रसाला गृह गृह प्रति लिखे
दोहा २७ · उत्तरकाण्ड
दोहा पाठ
चारु चित्रसाला गृह गृह प्रति लिखे बनाइ। राम चरित जे निरख मुनि ते मन लेहिं चोराइ॥ २७ ॥
अर्थ
घर-घर में सुन्दर चित्रशालाएँ हैं, जिनमें रामचरित बड़ी सुन्दरता के साथ सँवारकर अंकित किये हुए हैं। जिन्हें मुनि देखते हैं, तो वे उनके भी चित्त को चुरा लेते हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन” प्रकरण का दोहा २७ है। इस प्रकरण में चारों भाइयों के पुत्रजन्म, अयोध्या की शोभा और सनकादि मुनियों के श्रीराम से परम तत्त्व संवाद का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन