बोलेउ काकभसुंड बहोरी
बोलेउ काकभसुंड बहोरी
चौपाई १, दोहा ७० के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
बोलेउ काकभसुंड बहोरी। नभग नाथ पर प्रीति न थोरी॥ सब बिधि नाथ पूज्य तुम्ह मेरे। कृपापात्र रघुनायक केरे॥ १ ॥
अर्थ
काकभुशुण्डिजी ने फिर कहा-पक्षिराज पर उनका प्रेम कम न था (अर्थात् बहुत था)-हे नाथ! आप सब प्रकार से मेरे पूज्य हैं और श्रीरघुनाथजी के कृपापात्र हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ७० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा