श्रोता सुमति सुसील सुचि कथा रसिक

दोहा ६९ (ख) · उत्तरकाण्ड

दोहा पाठ

श्रोता सुमति सुसील सुचि कथा रसिक हरिदास। पाइ उमा अति गोप्यमपि सज्जन करहिं प्रकास॥ ६९ (ख) ॥

अर्थ

हे उमा! सुन्दर बुद्धिवाले, सुशील, पवित्र कथा के रसिक और हरि के दास श्रोता को पाकर सज्जन अत्यन्त गोपनीय (सबके सामने प्रकट न करने योग्य) रहस्य को भी प्रकट कर देते हैं।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का दोहा ६९ (ख) है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।

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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा