बीथीं सकल सुगंध सिंचाईं
बीथीं सकल सुगंध सिंचाईं
चौपाई २, दोहा ९ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
बीथीं सकल सुगंध सिंचाईं। गजमनि रचि बहु चौक पुराईं॥ नाना भाँति सुमंगल साजे। हरषि नगर निसान बहु बाजे॥ २ ॥
अर्थ
सारी गलियाँ सुगन्धित द्रव्यों से सिंचायी गयीं। गजमणियों से रचकर बहुत-से चौक पुराये गये। अनेकों प्रकार के सुमंगल-साज सजाये गये और हर्षपूर्वक नगर में बहुत-से निसान बजे।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “राम का स्वागत, भरत मिलाप” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के स्वागत और भरत मिलाप के आनंदमय प्रसंग का वर्णन है।
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राम का स्वागत, भरत मिलाप