भाव सहित खोजइ जो प्रानी
भाव सहित खोजइ जो प्रानी
चौपाई ८, दोहा १२० के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
भाव सहित खोजइ जो प्रानी। पाव भगति मनि सब सुख खानी॥ मोरें मन प्रभु अस बिस्वासा। राम ते अधिक राम कर दासा॥ ८ ॥
अर्थ
जो प्राणी उसे प्रेम के साथ खोजता है, वह सब सुखों की खान इस भक्तिरूपी मणि को पा जाता है। हे प्रभो! मेरे मन में तो ऐसा विश्वास है कि श्रीरामजी के दास श्रीरामजी से भी बढ़कर हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “ज्ञान और भक्ति की महिमा” प्रकरण का चौपाई ८, दोहा १२० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में ज्ञान, भक्ति और ज्ञानदीपक के प्रतीक द्वारा भक्ति की सहज महिमा का वर्णन है।
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ज्ञान और भक्ति की महिमा