पावन पर्बत बेद पुराना

चौपाई ७, दोहा १२० के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

पावन पर्बत बेद पुराना। राम कथा रुचिराकर नाना॥ मर्मी सज्जन सुमति कुदारी। ग्यान बिराग नयन उरगारी॥ ७ ॥

अर्थ

वेद-पुराण पवित्र पर्वत हैं। श्रीरामजी की नाना प्रकार की कथाएँ उन पर्वतों में सुन्दर खानें हैं। संत पुरुष [उनकी इन खानों के रहस्य को जानने वाले] मर्मी हैं और सुन्दर बुद्धि [खोदने वाली] कुदाल है। हे गरुड़जी! ज्ञान और वैराग्य- ये दो उनके नेत्र हैं।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “ज्ञान और भक्ति की महिमा” प्रकरण का चौपाई ७, दोहा १२० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में ज्ञान, भक्ति और ज्ञानदीपक के प्रतीक द्वारा भक्ति की सहज महिमा का वर्णन है।

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ज्ञान और भक्ति की महिमा