भरत सनेह सील ब्रत नेमा
भरत सनेह सील ब्रत नेमा
चौपाई २, दोहा ८ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
भरत सनेह सील ब्रत नेमा। सादर सब बरनहिं अति प्रेमा॥ देखि नगरबासिन्ह कै रीती। सकल सराहहिं प्रभु पद प्रीती॥ २ ॥
अर्थ
वे सब भरतजी के स्नेह, शील, व्रत और नेमों की अत्यन्त प्रेम से आदरपूर्वक बड़ाई कर रहे हैं। नगरवासियों की रीति देखकर वे सब प्रभु के चरणों के प्रति प्रीति की सराहना कर रहे हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “राम का स्वागत, भरत मिलाप” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के स्वागत और भरत मिलाप के आनंदमय प्रसंग का वर्णन है।
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राम का स्वागत, भरत मिलाप