बारंबार सकोप मुनि करइ निरूपन ग्यान
बारंबार सकोप मुनि करइ निरूपन ग्यान
दोहा १११ (क) · उत्तरकाण्ड
दोहा पाठ
बारंबार सकोप मुनि करइ निरूपन ग्यान। मैं अपने मन बैठ तब करउँ बिबिधि अनुमान॥ १११ (क) ॥
अर्थ
मुनि बार-बार क्रोधसहित ज्ञान का निरूपण करने लगे। तब मैं बैठा-बैठा अपने मन में अनेकों प्रकार के अनुमान करने लगा।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “लोमशजी से शाप और अनुग्रह” प्रकरण का दोहा १११ (क) है। इस प्रकरण में काकभुशुण्डिजी को लोमश मुनि द्वारा शाप और अनुग्रह मिलने तथा रामभक्ति दृढ़ होने का वर्णन है।
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लोमशजी से शाप और अनुग्रह