बालचरित कहि बिबिधि बिधि मन महँ

दोहा ६४ · उत्तरकाण्ड

दोहा पाठ

बालचरित कहि बिबिधि बिधि मन महँ परम उछाह। रिषि आगवन कहेसि पुनि श्रीरघुबीर बिबाह॥ ६४ ॥

अर्थ

मन में परम उत्साह भरकर अनेकों प्रकार की बाललीलाएँ कहकर, फिर ऋषि आगमन और श्रीरघुबीरजी का विवाह वर्णन किया।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का दोहा ६४ है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।

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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा