बहुरि राम अभिषेक प्रसंगा
बहुरि राम अभिषेक प्रसंगा
चौपाई १, दोहा ६५ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
बहुरि राम अभिषेक प्रसंगा। पुनि नृप बचन राज रस भंगा॥ पुरबासिन्ह कर बिरह बिषादा। कहेसि राम लछिमन संबादा॥ १ ॥
अर्थ
फिर श्रीरामजी के राज्याभिषेक का प्रसंग, फिर राजा दशरथजी के वचन से राजरस (राज्याभिषेक के आनन्द) में भंग पड़ना, फिर नगरवासियों का विरह, विषाद और श्रीराम-लक्ष्मण का संवाद कहा।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ६५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।
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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा