अस बिचारि जोइ कर सतसंगा

चौपाई १०, दोहा १२० के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

अस बिचारि जोइ कर सतसंगा। राम भगति तेहि सुलभ बिहंगा॥ १० ॥

अर्थ

ऐसा विचारकर जो भी संतों का संग करता है, हे गरुड़जी! उसके लिये श्रीरामजी की भक्ति सुलभ हो जाती है।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “ज्ञान और भक्ति की महिमा” प्रकरण का चौपाई १०, दोहा १२० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में ज्ञान, भक्ति और ज्ञानदीपक के प्रतीक द्वारा भक्ति की सहज महिमा का वर्णन है।

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ज्ञान और भक्ति की महिमा