अहह धन्य लछिमन बड़भागी
अहह धन्य लछिमन बड़भागी
चौपाई २, दोहा १ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
अहह धन्य लछिमन बड़भागी। राम पदारबिंदु अनुरागी॥ कपटी कुटिल मोहि प्रभु चीन्हा। ताते नाथ संग नहिं लीन्हा॥ २ ॥
अर्थ
अहा! लक्ष्मण बड़े धन्य और बड़भागी हैं, जो श्रीरामचन्द्रजी के चरणारविन्द के अनुरागी हैं (अर्थात् उनसे अलग नहीं हुए)। मुझे तो प्रभु ने कपटी और कुटिल पहचान लिया, इसीसे नाथ ने मुझे साथ नहीं लिया!
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “भरत विरह, हनुमान आगमन” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत के विरह, हनुमान के शुभ आगमन और अयोध्या में हर्ष का वर्णन है।
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भरत विरह, हनुमान आगमन