आगम निगम पुरान अनेका

चौपाई २, दोहा ४९ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

आगम निगम पुरान अनेका। पढ़े सुने कर फल प्रभु एका॥ तव पद पंकज प्रीति निरंतर। सब साधन कर यह फल सुंदर॥ २ ॥

अर्थ

[तथा] हे प्रभो! अनेक तंत्र, वेद और पुराणों के पढ़ने और सुनने का सर्वोत्तम फल एक ही है और सब साधनों का भी यही एक सुन्दर फल है कि आपके चरणकमलों में सदा-सर्वदा प्रेम हो।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “राम-वसिष्ठ संवाद, अमराई भ्रमण” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ४९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गुरु वसिष्ठ और श्रीराम के मध्य गूढ़ आध्यात्मिक संवाद तथा भाइयों सहित अमराई भ्रमण का वर्णन है।

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राम-वसिष्ठ संवाद, अमराई भ्रमण