सुनत गरुड़ कै गिरा बिनीता
सुनत गरुड़ कै गिरा बिनीता
चौपाई ३, दोहा ६४ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनत गरुड़ कै गिरा बिनीता। सरल सुप्रेम सुखद सुपुनीता॥ भयउ तासु मन परम उछाहा। लाग कहै रघुपति गुन गाहा॥ ३ ॥
अर्थ
गरुड़जी की विनम्र, सरल, सुन्दर प्रेमयुक्त, सुखप्रद और अत्यन्त पवित्र वाणी सुनते ही भुशुण्डिजी के मन में परम उत्साह हुआ और वे श्रीरघुनाथजी के गुणों की कथा कहने लगे।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ६४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।
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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा