तात मातु हा सुनिअ पुकारा

चौपाई २, दोहा २६ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

तात मातु हा सुनिअ पुकारा। एहिं अवसर को हमहि उबारा॥ हम जो कहा यह कपि नहिं होई। बानर रूप धरें सुर कोई॥ २ ॥

अर्थ

हाय बाप! हाय माँ! इस अवसर पर हमें कौन बचाएगा? [चारों ओर] यही पुकार सुनायी पड़ रही है। हमने तो पहले ही कहा था कि यह वानर नहीं है, वानर का रूप धरे कोई देवता है!

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “लंका दहन” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा पूँछ की अग्नि से समस्त लंका दहन का वर्णन है।

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लंका दहन