साधु अवग्या कर फलु ऐसा
साधु अवग्या कर फलु ऐसा
चौपाई ३, दोहा २६ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
साधु अवग्या कर फलु ऐसा। जरइ नगर अनाथ कर जैसा॥ जारा नगरु निमिष एक माहीं। एक बिभीषन कर गृह नाहीं॥ ३ ॥
अर्थ
साधु के अपमान का यह फल है कि नगर अनाथ के नगर की तरह जल रहा है। हनुमानजी ने एक ही क्षण में सारा नगर जला डाला। एक विभीषण का घर नहीं जलाया।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “लंका दहन” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा पूँछ की अग्नि से समस्त लंका दहन का वर्णन है।
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लंका दहन