ता कर दूत अनल जेहिं सिरिजा

चौपाई ४, दोहा २६ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

ता कर दूत अनल जेहिं सिरिजा। जरा न सो तेहि कारन गिरिजा॥ उलटि पलटि लंका सब जारी। कूदि परा पुनि सिंधु मझारी॥ ४ ॥

अर्थ

[शिवजी कहते हैं--] हे पार्वती! जिन्होंने अग्नि को बनाया, हनुमानजी उन्हीं के दूत हैं। इसी कारण वे अग्नि से नहीं जले। हनुमानजी ने उलट-पलटकर सारी लंका जला दी। फिर वे समुद्र में कूद पड़े।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “लंका दहन” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा पूँछ की अग्नि से समस्त लंका दहन का वर्णन है।

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लंका दहन