पूँछ बुझाइ खोइ श्रम धरि लघु
पूँछ बुझाइ खोइ श्रम धरि लघु
दोहा २६ · सुन्दरकाण्ड
दोहा पाठ
पूँछ बुझाइ खोइ श्रम धरि लघु रूप बहोरि। जनकसुता कें आगें ठाढ़ भयउ कर जोरि॥ २६ ॥
अर्थ
पूँछ बुझाकर, थकावट दूर करके और फिर छोटा-सा रूप धारण कर हनुमानजी जनकसुता के सामने हाथ जोड़कर जा खड़े हुए।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “लंका दहन” प्रकरण का दोहा २६ है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा पूँछ की अग्नि से समस्त लंका दहन का वर्णन है।
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लंका दहन