सुनु कपीस लंकापति बीरा

चौपाई ३, दोहा ५० के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनु कपीस लंकापति बीरा। केहि बिधि तरिअ जलधि गंभीरा॥ संकुल मकर उरग झष जाती। अति अगाध दुस्तर सब भाँती॥ ३ ॥

अर्थ

हे कपीस, हे लंकापति वीर! सुनो, इस गहरे समुद्र को किस प्रकार पार किया जाए ? अनेक जातियों के मगर, साँप और मछलियों से भरा हुआ यह अत्यन्त अथाह समुद्र पार करने में सब प्रकार से कठिन है।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “शुक दूत का आना, लक्ष्मण का पत्र” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ५० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में समुद्र पार करने के उपाय, शुक दूत का आगमन और लक्ष्मण के पत्र सहित वापसी का वर्णन है।

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शुक दूत का आना, लक्ष्मण का पत्र