पुनि सर्बग्य सर्ब उर बासी
पुनि सर्बग्य सर्ब उर बासी
चौपाई २, दोहा ५० के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
पुनि सर्बग्य सर्ब उर बासी। सर्बरूप सब रहित उदासी॥ बोले बचन नीति प्रतिपालक। कारन मनुज दनुज कुल घालक॥ २ ॥
अर्थ
फिर सब कुछ जानने वाले, सब के हृदय में बसने वाले, सर्वरूप, सबसे रहित, उदासीन, कारणवश मनुष्य बने हुए तथा राक्षसों के कुल का नाश करने वाले श्रीरामजी ने नीति की रक्षा करने वाले वचन बोले—
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “शुक दूत का आना, लक्ष्मण का पत्र” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ५० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में समुद्र पार करने के उपाय, शुक दूत का आगमन और लक्ष्मण के पत्र सहित वापसी का वर्णन है।
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शुक दूत का आना, लक्ष्मण का पत्र