सुनि सुत बध लंकेस रिसाना
सुनि सुत बध लंकेस रिसाना
चौपाई १, दोहा १९ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनि सुत बध लंकेस रिसाना। पठएसि मेघनाद बलवाना॥ मारसि जनि सुत बाँधेसु ताही। देखिअ कपिहि कहाँ कर आही॥ १ ॥
अर्थ
पुत्र का वध सुनकर रावण क्रोधित हो उठा और उसने [अपने जेठे पुत्र] बलवान् मेघनाद को भेजा। (उससे कहा कि--) हे पुत्र! मारना नहीं; उसे बाँध लाना। उस बंदर को देखा जाय कि कहाँ का है।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “अशोकवाटिका विध्वंस, नागपाश में बँधना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा अशोकवाटिका विध्वंस, अक्षयकुमार वध और मेघनाद के नागपाश में बँधकर रावण-सभा में जाने का वर्णन है।
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अशोकवाटिका विध्वंस, नागपाश में बँधना