चला इंद्रजित अतुलित जोधा
चला इंद्रजित अतुलित जोधा
चौपाई २, दोहा १९ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
चला इंद्रजित अतुलित जोधा। बंधु निधन सुनि उपजा क्रोधा॥ कपि देखा दारुन भट आवा। कटकटाइ गर्जा अरु धावा॥ २ ॥
अर्थ
इन्द्र को जीतनेवाला अतुलनीय योद्धा मेघनाद चला। भाई का मारा जाना सुन उसे क्रोध हो आया। हनुमानजी ने देखा कि अब एक भयानक योद्धा आया है। तब वे कटकटाकर गर्जे और दौड़े।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “अशोकवाटिका विध्वंस, नागपाश में बँधना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा अशोकवाटिका विध्वंस, अक्षयकुमार वध और मेघनाद के नागपाश में बँधकर रावण-सभा में जाने का वर्णन है।
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अशोकवाटिका विध्वंस, नागपाश में बँधना