कछु मारेसि कछु मर्देसि कछु मिलएसि

दोहा १८ · सुन्दरकाण्ड

दोहा पाठ

कछु मारेसि कछु मर्देसि कछु मिलएसि धरि धूरि। कछु पुनि जाइ पुकारे प्रभु मर्कट बल भूरि॥ १८ ॥

अर्थ

उन्होंने सेना में कुछ को मार डाला और कुछ को मसल डाला और कुछ को पकड़-पकड़कर धूल में मिला दिया। कुछ ने फिर जाकर पुकार की कि हे प्रभु! बंदर बहुत ही बलवान है।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “अशोकवाटिका विध्वंस, नागपाश में बँधना” प्रकरण का दोहा १८ है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा अशोकवाटिका विध्वंस, अक्षयकुमार वध और मेघनाद के नागपाश में बँधकर रावण-सभा में जाने का वर्णन है।

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अशोकवाटिका विध्वंस, नागपाश में बँधना